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Friday, January 9, 2026

बौद्ध पर्यटन को गति, कौशांबी में बुद्ध थीम पार्क के विकास ने पकड़ी रफ्तार...

रिपोर्ट- ईश्वर दीन साहू


लखनऊ/कौशांबी : कौशांबी की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को नई ऊंचाई देने की दिशा में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग महत्वाकांक्षी परियोजना को मूर्त रूप दे रहा है। कोसम इनाम गांव में निर्माणाधीन बुद्ध थीम पार्क को तेजी से विकसित किया जा रहा है, जहां भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन और करुणा संदेश को कलात्मक मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा। यह थीम पार्क करीब 11 हेक्टेयर क्षेत्र में 22.93 करोड़ रुपए की लागत से आकार ले रहा है, जिसे मौजूदा वर्ष के अंत तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। मंत्री ने बताया कि 'सरकार की परिकल्पना के अनुसार यह पार्क देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों के लिए एक विशिष्ट आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल कौशांबी को वैश्विक बौद्ध पर्यटन सर्किट में सशक्त स्थान दिलाएगी, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।' 'बुद्धचरित वनम' होगा मुख्य आकर्षण। कौशांबी में निर्माणाधीन बुद्ध थीम पार्क को तेलंगाना के नागार्जुन सागर स्थित 'बुद्धवनम' की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस थीम पार्क में ध्यान एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी अनेक सुविधाएं प्रस्तावित हैं।


 पार्क में विभिन्न 'मुद्राओं' जैसे- धर्मचक्र मुद्रा, अभय मुद्रा, भूमिस्पर्श मुद्रा आदि  पर आधारित एक ध्यान केंद्र स्थापित किया जाएगा। परियोजना का प्रमुख आकर्षण 'बुद्धचरित वनम' होगा, जिसमें भगवान बुद्ध की जीवन यात्रा (जन्म से महापरिनिर्वाण तक) को मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा। विभिन्न देशों के स्तूपों की प्रतिकृतियां होंगी स्थापित। इसके अलावा, विकसित की जा रही जातक म्यूरल गैलरी, ध्यान वनम और स्तूप गैलरी जैसे विशिष्ट जोन आगंतुकों को भगवान बुद्ध के जीवन-दर्शन से आत्मिक रूप से जोड़ेंगे। विशेष रूप से स्तूप गैलरी में श्रीलंका, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, नेपाल, तिब्बत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान सहित विभिन्न देशों के 13 प्रतिष्ठित स्तूपों की प्रतिकृतियों के साथ-साथ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों का प्रतिनिधित्व किया जाएगा, जिससे यह परिसर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र सांस्कृतिक-आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।बौद्ध धर्म में कौशांबी क्यों महत्वपूर्ण। उत्तर प्रदेश में भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों में कौशांबी महत्वपूर्ण है। तथागत ने यहां छठा और नौवां वर्षावास व्यतीत किया था। इन्हीं कालखंडों में बुद्ध ने कई उपदेश दिए, जिससे इस क्षेत्र में बौद्ध दर्शन का व्यापक प्रसार हुआ। समय के साथ कौशांबी आध्यात्मिक शिक्षा का एक सशक्त केंद्र बना। यह परंपरा आज भी जारी है। 'बौद्ध सर्किट से जुड़े स्थलों का विकास प्राथमिकता' पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट में कौशांबी का विशिष्ट स्थान है। यहां बौद्ध धर्म के अलावा इतिहासकार, शोधार्थी और अन्य धर्मों से जुड़े पर्यटकों का निरंतर आगमन होता है। वर्ष 2025 के जनवरी से सितंबर के बीच जनपद में कुल 23.19 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया, जिनमें 2,884 विदेशी शामिल हैं। विभाग द्वारा बुद्ध सर्किट से जुड़े स्थलों पर पर्यटक सुविधाओं का लगातार विकास किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक असर दिख रहा है। बुद्ध थीम पार्क जैसी परियोजनाएं न केवल प्राचीन सभ्यतागत मूल्यों का संरक्षण करती हैं, बल्कि भगवान बुद्ध के संदेश और ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में भी सहायक होंगी।' आगंतुकों को मिले विशिष्ट पर्यटन अनुभव- प्रमुख सचिव प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात ने बताया कि 'कौशांबी का बुद्ध थीम पार्क विरासत संरक्षण और उच्च गुणवत्ता वाले पर्यटन अधोसंरचना के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण है। भगवान बुद्ध से कौशांबी का गहरा संबंध रहा है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल बनाता है। विकास कार्यों में गुणवत्ता और प्रामाणिकता का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि दुनियाभर के आगंतुकों को आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर पर्यटन अनुभव प्राप्त हो।'

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