रिपोर्ट- ईश्वर दीन साहू
प्रयागराज : मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. राकेश शर्मा, सीएमओ प्रयागराज डॉ. अरुण तिवारी, सीएमएस एसआरएन चिकित्सालय डॉ. नीलम एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। ट्रॉमा सेंटर में स्टैंडर्ड हॉस्पिटल प्रोटोकॉल एवं एंटीसेप्टिक कंडीशंस बनाए रखने पर जोर दिया गया। निरीक्षण के दौरान सफाई, संक्रमण नियंत्रण, मेडिकल सामग्री के रख-रखाव एवं क्विक रिस्पॉन्स व्यवस्था में कमियां मिली। विभिन्न वार्डों एवं ओपीडी के निरीक्षण तथा मरीजों से बातचीत के दौरान दवाइयां एवं जांच बाहर से कराए जाने की शिकायतें सामने आईं। मरीजों द्वारा बाहर की दवाइयों के पर्चे एवं जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गईं। उपकरणों की स्टेरिलाइजेशन, बेडशीट, बायोमेडिकल वेस्ट सेग्रीगेशन एवं स्वच्छता व्यवस्था में भी कमियां मिलीं। मंडलायुक्त ने सीएमएस को सभी व्यवस्थाएं निर्धारित प्रोटोकॉल एवं एसओपी के अनुरूप चार दिन में दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। साथ ही अपर निदेशक स्वास्थ्य से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी/कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी तथा चार दिन बाद पुनः औचक निरीक्षण किया जाएगा। मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने आज अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. राकेश शर्मा, सीएमओ प्रयागराज डॉ. अरुण तिवारी, सीएमएस एसआरएन चिकित्सालय डॉ. नीलम एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने सर्वप्रथम ट्रॉमा सेंटर स्थित हेल्प डेस्क, ट्रॉमा ट्रायेज रूम एवं वार्ड संख्या-01 का निरीक्षण किया। ट्रॉमा सेंटर में सफाई व्यवस्था अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई तथा मंडलायुक्त के पहुंचने के समय ही सफाई का कार्य कराया जा रहा था। ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की देखभाल एवं क्विक रिस्पॉन्स व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली और व्यवस्थाएं काफी ढीली-ढाली एवं धीमी पाई गईं।
ट्रॉमा ट्रायेज रूम में दवाइयों, इंजेक्शनों एवं अन्य मेडिकल सामग्री के रख-रखाव में निर्धारित एसओपी का पालन नहीं पाया गया। मौके पर धूल एवं गंदगी, बायोमेडिकल वेस्ट का उचित सेग्रीगेशन न होना तथा फोर्सेप्स एवं अन्य उपकरणों की समुचित सफाई न होने जैसी कमियां मिलीं। फोर्सेप्स की सफाई के लिए प्रयुक्त लिक्विड भी पुराना पाया गया तथा एंटीसेप्टिक व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं मिली। कुछ बेडशीट पर गंदगी एवं ब्लड लगा हुआ पाया गया, जो संक्रमण फैलने का कारण बन सकता है। मंडलायुक्त ने उपस्थित रेजिडेंट एवं इंटर्न डॉक्टरों से व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली और कहा कि यहां बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर एवं गरीब मरीज उपचार के लिए आते हैं, इसलिए उन्हें स्वच्छ, सुरक्षित एवं मानक के अनुरूप चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है। ट्रॉमा सेंटर के समीप माइनर ओटी/ड्रेसिंग रूम का निरीक्षण करने पर भी सफाई व्यवस्था खराब मिली। एक महिला मरीज के खुले घाव के उपचार की स्थिति अच्छी नहीं थी और वह अनअटेंडेड पाई गई। मंडलायुक्त ने संबंधित चिकित्सकीय स्टाफ को मरीजों की देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। एक्स-रे कक्ष की ओर जाते समय मंडलायुक्त ने एक वृद्ध गंभीर मरीज को ऑक्सीजन लगी अवस्था में अनअटेंडेड पाया। पूछताछ में पता चला कि मरीज के अटेंडेंट के पास एक्स-रे की पर्ची नहीं थी, जिसके कारण वे एक्स-रे के लिए इंतजार कर रहे थे। मंडलायुक्त ने संबंधित प्रभारी एवं चिकित्सकों को तत्काल मरीज का एक्स-रे कराने तथा उसके अटेंडेंट के साथ उसे संबंधित वार्ड में भेजने के निर्देश दिए। एक्स-रे कक्ष के निरीक्षण में सफाई व्यवस्था अत्यंत खराब पाई गई। एक्स-रे मशीन के आसपास धूल एवं गंदगी, टूटी कुर्सी, कार्टन में स्क्रैप सामग्री तथा स्टाफ के हेलमेट रखे पाए गए। मशीन के आसपास अनावश्यक सामान रखा होना भी पाया गया। एक स्थान पर कई पुरानी पर्चियां भी डंप की गई थीं। मंडलायुक्त ने संबंधित टेक्नीशियन को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल सफाई कराने, स्क्रैप एवं अनावश्यक सामग्री हटाने तथा पूरे एक्स-रे कक्ष को निर्धारित एसओपी के अनुरूप व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। मेल ऑर्थो वार्ड संख्या-02 में मंडलायुक्त ने भर्ती मरीजों से बातचीत की। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें दवाइयां बाहर से लाने के लिए पर्चे दिए जाते हैं। मरीजों ने बाहर से कराई गई एक्स-रे एवं अन्य जांचों की पर्चियां तथा रिपोर्ट भी दिखाईं। इन पर्चियों एवं रिपोर्टों को देखने के बाद मंडलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों एवं सीएमएस से पूछताछ की। उपस्थित डॉक्टरों ने बताया कि कॉरपोरेशन द्वारा उन्हें बहुत सारी आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाती हैं, जिस वजह से बहुत से मरीजों को बाहर से मेडिसिन लेने के लिए भेजना पड़ता है। निरीक्षण के दौरान मरीजों को इंजेक्शन की डोज पहले से दिए जाने की स्थिति भी मिली। पूछने पर बताया गया कि 24 घंटे की डोज मरीज को पहले से उपलब्ध करा दी जाती है। मंडलायुक्त ने इस व्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्धारित एसओपी के अनुसार ही दवाइयों एवं इंजेक्शनों के रख-रखाव एवं उपयोग के निर्देश दिए। ईएनटी ओपीडी के निरीक्षण में जांच के लिए प्रयुक्त उपकरण, फोर्सेप्स एवं अन्य सामग्री पर्याप्त रूप से स्टेरिलाइज्ड नहीं मिली। बेडशीट गंदी थी तथा कॉटन/गॉज सहित अन्य सामग्री भी अस्वच्छ एवं अव्यवस्थित स्थिति में पाई गई। मंडलायुक्त ने वहां उपस्थित रेजिडेंट एवं संबंधित स्टाफ को बुलाकर कहा कि मरीज बड़ी अपेक्षा और विश्वास के साथ अस्पताल आते हैं। इसलिए पूर्ण स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, उपकरणों की उचित स्टेरिलाइजेशन व्यवस्था एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करना सभी का दायित्व है। महिला ऑर्थो वार्ड के निरीक्षण के दौरान रैंडम आधार पर मरीजों एवं उनके परिजनों से बातचीत की गई। कई मरीजों ने दवाइयां एवं जांच बाहर से लिखे जाने की जानकारी दी। कुछ मरीजों ने बाहर से खरीदी गई दवाइयों के पर्चे एवं बाहर कराई गई जांचों की रिपोर्ट साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की, जबकि कुछ मरीजों एवं परिजनों द्वारा छोटी-छोटी सेवाओं के लिए कर्मचारियों द्वारा पैसे मांगे जाने की बात भी मंडलायुक्त के संज्ञान में लाई गई। मंडलायुक्त ने सीएमएस एसआरएन चिकित्सालय डॉ. नीलम को अस्पताल की सभी व्यवस्थाओं को निर्धारित प्रोटोकॉल एवं एसओपी के अनुरूप चार दिन के भीतर दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चार दिन बाद अस्पताल का पुनः औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का सत्यापन किया जाएगा। निरीक्षण में सामने आई कमियों एवं मरीजों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के दृष्टिगत अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. राकेश शर्मा से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में जो भी अधिकारी/कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हेतु जांच रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाएगी।