Wednesday, July 29, 2026

स्वयम मूक्स के विकास पर मुविवि में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला प्रारंभ

रिपोर्ट- ईश्वर दीन साहू 

प्रयागराज : नई शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में सेन्टर फॉर ऑनलाइन एजुकेशन के तत्वावधान में बुधवार को स्वयम मूक्स के विकास विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रो. सत्यकाम ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कहा कि आज का युग डिजिटल शिक्षा का युग है। प्रत्येक शिक्षक को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों में दक्ष होना आवश्यक है। अन्यथा वह बदलते समय के साथ कदम से कदम नहीं मिला पाएगा।प्रो. सत्यकाम ने कहा कि सभी मुक्त विश्वविद्यालयों का एकमात्र लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। स्वयम भारत सरकार का ऐसा राष्ट्रीय मंच है जिसके माध्यम से यह लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय द्वारा स्वयम के साथ किए जा रहे प्रयासों को नई गति प्रदान करेगी और भविष्य में गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के बाद विश्वविद्यालय के अधिक से अधिक कोर्स  स्वयम प्लेटफार्म पर उपलब्ध होंगे, जिससे न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश के शिक्षार्थियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा स्वयम तथा स्वयम प्रभा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण डिजिटल पाठ्यक्रमों के विकास की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। कार्यशाला के रिसोर्स पर्सन एवं मुख्य वक्ता प्रो. जितेन्द्र पाण्डेय, प्रोफेसर एवं निदेशक, स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी ने प्रतिभागियों को स्वयम एवं मूक्स की अवधारणा, पाठ्यक्रम संरचना, ई-कंटेंट विकास, वीडियो व्याख्यान निर्माण, मूल्यांकन प्रणाली, गुणवत्ता मानकों तथा पाठ्यक्रम प्रस्तुतीकरण की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने प्रतिभागियों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से स्वयम पाठ्यक्रम प्रस्ताव तैयार करने, मॉड्यूल निर्माण, शिक्षण परिणाम, मूल्यांकन योजना तथा गुणवत्ता आश्वासन के विभिन्न आयामों पर प्रशिक्षण दिया। प्रो. पाण्डेय ने कहा कि मूक्स के माध्यम से अब कोई भी छात्र घर बैठे देश के श्रेष्ठ शिक्षकों से निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकता है। कार्यशाला के संयोजक एवं सेन्टर फॉर ऑनलाइन एजुकेशन के निदेशक प्रो. ए.के. मलिक ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में डिजिटल शिक्षा एवं ऑनलाइन अधिगम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।  प्रो. मलिक ने कार्यशाला के उद्देश्यों, तकनीकी सत्रों तथा प्रतिभागियों को मिलने वाले व्यावहारिक प्रशिक्षण की विस्तृत जानकारी दी। जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि इस अवसर पर विद्या शाखाओं के निदेशक, शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी एवं शिक्षाविदों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक बताते हुए इसे डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यशाला के प्रति युवा शिक्षकों में गजब का उत्साह देखा गया। संचालन डॉ. तूबा फातमा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जूमी सिंह ने किया। कार्यशाला का समापन

जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने किया जिला कारागार का आकस्मिक निरीक्षण...

रिपोर्ट- ईश्वर दीन साहू 

कौशाम्बी : पुलिस अधीक्षक श्री सत्यनारायण द्वारा जिलाधिकारी डॉ0 अमित पाल के साथ जिला कारागार कौशाम्बी का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारियों द्वारा बंदियों से संवाद स्थापित कर उनकी सुविधाओं एवं समस्याओं की जानकारी ली गई। साथ ही जेल परिसर में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने, प्रतिबंधित सामग्री के प्रवेश पर रोक लगाने, तथा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु संबंधितहै अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक व संबंधित अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

थाना पूरामुफ्ती पुलिस ने एक वारण्टी अभियुक्त को किया गिरफ्तार...

रिपोर्ट- ईश्वर दीन साहू 

प्रयागराज : थाना पूरामुफ्ती पुलिस द्वारा माननीय न्यायालय द्वारा निर्गत वारण्ट मु0न0 683/18 मु0अ0सं0 565/2017 धारा 135बी विद्युत अधिनियम थाना पूरामुफ्ती कमिश्नरेट प्रयागराज से सम्बन्धित 01 वारण्टी अभियुक्त चन्दन पुत्र रोशन निवासी ग्राम गोविन्दपुर तेवारा थाना पूरामुफ्ती जनपद प्रयागराज को  ग्राम गोविन्दपुर तेवारा थाना क्षेत्र  पूरामुफ्ती से गिरफ्तार किया गया । नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्यवाही की गयी। गिरफ्तार वारण्टी अभियुक्त का विवरण- चन्दन पुत्र रोशन निवासी ग्राम गोविन्दपुर तेवारा थाना पूरामुफ्ती जनपद प्रयागराज उम्र 43 वर्ष सम्बन्धित वारण्ट का विवरण मु0नं0 683/18  मु0अ0सं0 565/2017  धारा 135बी विद्युत अधिनियम थाना पूरामुफ्ती कमिश्नरेट प्रयागराज गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम का विवरण- 1. उ0नि0 विश्वास थाना पूरामुफ्ती कमिश्नरेट प्रयागराज। 2. रि0कां0 सत्येन्द्र विश्वकर्मा  थाना पूरामुफ्ती कमिश्नरेट प्रयागराज


उपाध्यक्ष, उ० प्र० राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आंधी, तूफान, वज्रपात, बाढ़ के सम्बंध में संचालित आपदा प्रबंधन गतिविधियों की समीक्षा की...

रिपोर्ट- ईश्वर दीन साहू


प्रयागराज : लेफ्टिनेंट जनरल/माननीय उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण योगेन्द्र डिमरी की अध्यक्षता में बुधवार को एनआईसी सभागार में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा संचालित आपदा प्रबंधन गतिविधियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में माननीय उपाध्यक्ष ने कहा कि आंधी, तूफान, वज्रपात एवं बाढ़ से जनहानि न होने पाये, इसके लिए सावधानियों एवं जारी होने वाली चेतावनियों के बारे में व्यापक रूप से जनजागरूकता अभियान चलाया जाये। उन्होंने कहा कि जनजागरूता के लिए तहसील, ब्लाक स्तर एवं ग्राम पंचायत स्तर पर गोष्ठियों एवं अन्य माध्यमों से लोगो को जागरूक किया जाये, जिससे कि लोग आंधी, तूफान एवं वज्रपात के समय सावधानियां बरते हुए अपने को सुरक्षित कर सके। उन्होंने कहा कि स्कूलों में भी बच्चों के मध्य आपदा प्रबंधन के अन्तर्गत आंधी-तूफान एवं वज्रपात से बचाव के उपायों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी दी जाये। कहा कि लोगो को आपदा के सम्बंध में जानकारी होने पर वे अपना बचाव समय से कर सकते है। उन्होंने कहा कि मौसम की जानकारी के लिए बनाये गये सचेत एप एवं दामिनी एप को अधिक से अधिक लोग डाउनलोड करें तथा उसके माध्यम से दिए जाने वाले निर्देशों, सावधानियों एवं चेतावनियों को गम्भीरता से लेते हुए उसका अनुपालन करें। सावधानी बरतने से जनहानि को शून्य किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तरफ से नियमित रूप से अलर्ट जारी किया जाता है, लोग उसको गम्भीरता से लें तथा तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाये, जिससे कि प्राकृतिक आपदाओं से बच सके। लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि लोगो को विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जाये कि आंधी-तूफान एवं वज्रपात के समय टीन की छत, होल्डिंग, क्षतिग्रस्त मकान, पेड़, बिजली के खम्भे से दूर रहे। घर के बाहर या छत पर रखी हुई भारी वस्तुएं उड़ सकती है, इसलिए उन्हें बांध कर रख दंे। यात्रा कर रहे हो तो ऐसे समय पर सुरक्षित स्थान देखकर रूक जाये। उन्होंने कहा कि धारदार एवं नुकुली वस्तुओं को खुले में न रखे। धातु से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें एवं पेड की शरण में न जाये। आकाशीय विद्युत के परिप्रेक्ष्य में सावधानियां बरतते हुए पक्के मकान की शरण में चले जाये, खिड़की, दरवाजें  एवं बरामदे से दूर रहे। पेड, मोबाइल टावर, बिजली के खम्भो, कच्चे मकान, तालाब तथा जलाशय से दूरी बनाकर रखे। खराब मौसम में बच्चों को बाहर न खेलने दे। लोहे की खिड़की, दरवाजें व हैण्डपम्प आदि को न छूए। यदि खुले खेत में फंस जाये, तो दोनो कानों को बंद कर पैरो को सटा लें तथा घुटनों का टेक ले। वर्षा आंधी तूफान आकाशीय बिजली एवं बदलते मौसम के सटीक पूर्वानुमान हेतु सचेत एप एवं दामिनी एप अवश्य अपलोड करें। आकाशीय विद्युत के परिप्रेक्ष्य में सावधानियों के रूप में पेड के नीचे न खड़े हो। दीवार के सहारे टेक न लगाये। धातु युक्त नल एवं फ्रीज को न छुए। धातु से बने छाते का प्रयोग न करें। घरों में चलने वाले भारी विद्युत उपकरणों को प्लक से अलग कर दें। खुले वाहनों में सवारी न करें। बचाव के लिए जमीन पर न लेटे तथा तैराकी व नौकायन न करें। उन्होंनें कहा कि उपरोक्त के सम्बंध में लोगो को जागरूक करने के लिए ग्राम स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाये, जिससे कि लोगो को बरतने वाली सावधानियों एवं बचाव के उपायों के बारे में जानकारी हो सके तथा लोग अपने को आपदा से बचाव कर सके। इस अवसर पर जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि आंधी, तूफान एवं वज्रपात के सम्बंध में प्राप्त होने वाली चेतावानियों को तत्काल विभिन्न माध्यमों से लोगो के मध्य प्रसारित किया जाता है, जिससे कि अधिक से अधिक लोगो को जानकारी हो सके और वे अपना बचाव कर सके। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह, अपर जिलाधिकारी आपूर्ति, अपर नगर आयुक्त सहित अन्य सम्बंधित विभागों के अधिकारीगण तथा एनडीआरएफ के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा सुरक्षा समिति एवं जिला पर्यावरण की बैठक की

रिपोर्ट- ईश्वर दीन साहू


प्रयागराज : जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को संगम सभागार में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा सुरक्षा समिति एवं जिला पर्यावरण की बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत रोपित पौधों की सुरक्षा एवं उनके समुचित रखरखाव की समीक्षा की। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि रोपित पौधों के संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए तथा सभी विभाग नियमित रूप से पौधों की जीवितता सुनिश्चित करें। बैठक में वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत रोपित पौधों की जियो-टैगिंग की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि जियो-टैगिंग का कार्य समयबद्ध एवं शत-प्रतिशत पूर्ण किया जाए, जिससे पौधारोपण कार्यों का प्रभावी अनुश्रवण एवं सत्यापन सुनिश्चित हो सके। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग निर्धारित प्रारूप में समस्त अभिलेख एवं सूचनाएँ शीघ्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। बैठक में समस्त विभागों द्वारा कराए गए वृक्षारोपण का मासिक सत्यापन कर प्रत्येक माह की 20 तारीख तक पौधों की जीवितता संबंधी सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि सत्यापन कार्य सॉफ्ट-10 डैशबोर्ड पर अपेक्षित मासिक सूचना के अनुरूप नियमित रूप से अद्यतन किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा, देखभाल एवं जीवितता सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है । उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने जिला गंगा समिति की समीक्षा करते हुए प्रभागीय निदेशक श्री अरविंद कुमार यादव द्वारा नमामि गंगे के अंतर्गत नुमायां डाही आर्द्रभूमि के संरक्षण एवं समेकित प्रबंधन पर चर्चा की गई। इस दौरान गंगा टास्क फोर्स द्वारा रिवर मैपिंग, सर्विलांस, पेट्रोलिंग एवं जनजागरूकता गतिविधियों के माध्यम से संरक्षण कार्यों में सहयोग करने, जिला पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के सीवेज डिस्पोजल एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा डीसी, एनआरएलएम द्वारा ग्राम भ्रमण कर स्थानीय समुदाय की सहभागिता बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त मत्स्य विभाग सहित संबंधित विभागों के समन्वय से वेटलैंड संरक्षण हेतु समग्र कार्ययोजना तैयार करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। जिला पर्यावरण समिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने जल निगम (ग्रामीण) को शहरी नालों की टैपिंग का कार्य शीघ्र पूर्ण कराने तथा पंचायती राज विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों के नालों का निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मा० राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली के आदेशों के अनुपालन में जनपद प्रयागराज में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की प्रगति एवं क्रियान्वयन तथा प्रतिबंधित चाइनीज/नायलॉन मांझा के विरुद्ध की गई कार्यवाही की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वायु गुणवत्ता सुधार हेतु संचालित विभिन्न कार्य योजनाओं, वायु गुणवत्ता निगरानी, जन-जागरूकता कार्यक्रमों, हरित क्षेत्र विस्तार एवं प्रदूषण नियंत्रण संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की गई तथा संबंधित विभागों को निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु समयबद्ध एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही नगर निगम, पुलिस विभाग एवं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रतिबंधित चाइनीज/नायलॉन मांझा के निर्माण, भंडारण, परिवहन, बिक्री एवं उपयोग के विरुद्ध की गई छापेमारी, जब्ती एवं विधिक कार्यवाही की जानकारी प्रस्तुत की गई। माननीय अध्यक्ष महोदय द्वारा निर्देशित किया गया कि नियमित प्रवर्तन अभियान चलाकर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा आमजन को प्रतिबंधित मांझा के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने हेतु व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाएं। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी श्री अरविंद यादव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारीगण, जिला स्तरीय समिति के सदस्य एवं वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

Tuesday, July 28, 2026

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और धमकियों पर जताई चिंता, सुरक्षा के लिए डीएम, एडिशनल कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन...

रिपोर्ट- ईश्वर दीन साहू


प्रयागराज। पत्रकारों की सुरक्षा, को लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब का एक प्रतिनिधि मंडल जिला अधिकारी मनीष कुमार वर्मा और एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा से मिला। मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि पत्रकार निर्भय होकर अपना काम करें अगर कोई अराजक तत्व इनको हनी पहुंचाएगी उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारी को कार्रवाई का आदेश दिया। इसी तरह एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ अजय पाल शर्मा ने प्रतिनिधि मंडल की बातों को सुना और तत्काल संबंधित थाने के प्रभारी को दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया सम्मान और निर्भय होकर कार्य वातावरण सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर मंगलवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने क्लब के संस्थापक संरक्षक वीरेंद्र पाठक के नेतृत्व में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को और एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ अजय पाल शर्मा को एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने हाल के दिनों में पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं से जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई तथा पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था किए जाने की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि 25 जुलाई को प्रयागराज में छात्रों के प्रदर्शन की कवरेज के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने महिला पत्रकार अनम फातिमा सहित कई पत्रकारों के साथ अभद्रता की ।  महिला पत्रकार के साथ अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया तथा शारीरिक क्षति भी पहुंचाई। महिला पत्रकार ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पूरी घटना से अवगत कराया। इसके अलावा नवाबगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले एक राष्ट्रीय समाचार चैनल के पत्रकार विकास मिश्रा ने भी जिलाधिकारी को बताया कि उन्होंने अपने क्षेत्र में तालाब की भूमि पर  अवैध कब्जे की खबर प्रसारित की थी। इससे नाराज कुछ लोगों ने उन्हें रास्ते में रोककर जान से मारने की धमकी दी और भविष्य में इस प्रकार की खबर प्रकाशित या प्रसारित करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। क्लब के संस्थापक संरक्षक वीरेंद्र पाठक ने कहा कि जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले पत्रकारों को अक्सर विभिन्न प्रकार के दबाव, धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति और सख्त नियम बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि वे निर्भीक होकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और पत्रकारों को हरसंभव सहयोग तथा आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिनिधि मंडल में अनम फातिमा आरव भरद्वाज अरविन्द सिंह विकास मिश्र शम्स ताज,  धीरज। आयुष श्रीवास्तव हिमांशु राज राजिक आदि उपस्थित थे।

विश्वविद्यालय और स्कूल-कॉलेजों में लागू होना चाहिए प्रवासन पर पाठ्यक्रम- डॉ अजय कुमार मिश्र प्राचार्य

ब्यूरो रिपोर्ट- सुनील कुमार

महराजगंज : "बेटा विदेश चला गया, 1 लाख भेजता है" - ये एक लाइन आज भारत के हर छोटे-बड़े कस्बे में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली लाइन बन गई है। माँ-बाप गर्व से कहते हैं, पड़ोसी सुनकर आंखें फाड़ लेते हैं। लेकिन इस एक लाइन के पीछे कितने घर बिके, कितनी जमीन गिरवी रखी गई, कितने बेटे पासपोर्ट छिनने के बाद विदेश की जेलों में सड़ रहे हैं, ये कोई नहीं बताता। कारण बहुत सीधा है। हमारे स्कूल और कॉलेज बच्चों को कैलकुलस, कोडिंग, अकाउंटिंग, GST सब सिखा देते हैं। लेकिन जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला, यानी "विदेश कैसे सुरक्षित जाएं", इस पर एक पीरियड भी नहीं लगता। नतीजा ये है कि हर साल हजारों युवा एजेंटों के झूठे वादों में आकर तस्करी, बंधुआ मजदूरी और धोखे का शिकार बन रहे हैं। विदेश मंत्रालय और संसद में पिछले तीन सत्रों में दिए गए आंकड़े डराने वाले हैं। 2023 से 2025 के बीच सिर्फ खाड़ी देशों, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड और यूरोप के "डंकी रूट" से जुड़े मामलों में भारतीय दूतावासों में 15,000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 62 प्रतिशत मामले ऐसे थे जहां युवा को टूरिस्ट या विजिट वीजा पर भेजकर वहां अवैध रूप से काम करवाया गया। इन पीड़ितों में 70 प्रतिशत 18 से 30 साल की उम्र के ग्रेजुएट, डिप्लोमा होल्डर या ITI पास युवा थे। सबसे ज्यादा मामले पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आए। एक अनुमान के अनुसार "फ्री जॉब", "2 महीने में कनाडा", "दुबई में 1.5 लाख सैलरी" के नाम पर चलने वाला ये अवैध नेटवर्क हर साल 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार करता है। ये सिर्फ पैसों का खेल नहीं है। ये सपनों, कर्ज और जिंदगियों का सौदा है। अब सवाल उठता है कि ये सब हो क्यों रहा है। क्या युवा आलसी हैं? नहीं। क्या परिवार लालची हैं? नहीं। असल समस्या जानकारी की कमी है। एक 19 साल का लड़का जो http://B.Com कर रहा है, उसे ये नहीं पता कि वर्क वीजा और टूरिस्ट वीजा में क्या फर्क है। उसे नहीं पता कि भारत सरकार का eMigrate पोर्टल क्या है और POE यानी Protector of Emigrants से रजिस्टर्ड एजेंट की लिस्ट कहां मिलती है। उसे ये नहीं बताया गया कि अगर कोई एजेंट कहे "पहले 10 लाख दो, वीजा पक्का है" तो वो 100 प्रतिशत फ्रॉड है। उसे ये नहीं पता कि विदेश में मुसीबत आने पर 1800-11-3090 हेल्पलाइन या नजदीकी भारतीय दूतावास से कैसे संपर्क करना है। हम स्कूल में सड़क पार करना, साइबर फ्रॉड से बचना, गुड टच बैड टच सब सिखाते हैं। लेकिन दुनिया के सबसे बड़े श्रम निर्यातक देश का नागरिक बनने की शिक्षा नहीं देते। कॉलेज की स्थिति और भी गंभीर है। प्लेसमेंट सेल कंपनियां लाता है, पर उन कंपनियों की विदेश में वैधता कौन चेक करेगा ये कोई नहीं बताता। करियर काउंसलिंग में "अमेरिका में MS करो" या "कनाडा में PR लो" की बात होती है, पर उसके लिए जरूरी IELTS स्कोर, स्किल सर्टिफिकेट, बैंक बैलेंस और कानूनी प्रक्रिया कौन समझाएगा। इसी खालीपन को एजेंट भरते हैं। वो Instagram, Facebook, WhatsApp पर "No IELTS, No Experience, 15 Days में जर्मनी" जैसे विज्ञापन चलाते हैं। युवा फॉर्म भरता है, इंटरव्यू होता है, फर्जी ऑफर लेटर आता है और 3 महीने बाद वो लड़का कंबोडिया के किसी साइबर फ्रॉड सेंटर में 16 घंटे कंप्यूटर पर बैठा मिलता है। पासपोर्ट जमा, मारपीट, और टारगेट पूरा न करने पर बिजली के झटके। 2024 में म्यांमार और कंबोडिया से 500 से ज्यादा भारतीय युवाओं को विदेश मंत्रालय और सेना की मदद से छुड़ाया गया। इनमें से अधिकांश ने कहा "सर हमें लगा था IT की नौकरी है"। इसलिए अब वक्त आ गया है कि हम प्रवासन को टैबू की तरह न देखें। युवा विदेश जाएंगे, ये तय है। भारत दुनिया को सबसे ज्यादा रेमिटेंस भेजने वाला देश है। 2024 में ही 120 बिलियन डॉलर से ज्यादा विदेश से भारत आया। ये देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लेकिन ये रेमिटेंस सम्मान से कमाया जाए, जान जोखिम में डालकर नहीं। इसके लिए समाधान सिर्फ पुलिस और कानून नहीं है। समाधान कक्षा से शुरू होगा।
  स्कूल स्तर पर कक्षा 9 से 12 तक "सुरक्षित प्रवासन" का एक बेसिक मॉड्यूल जोड़ा जाना चाहिए। ये 8-10 पीरियड का मॉड्यूल होगा। इसमें बच्चों को बताया जाए कि विदेश में नौकरी के प्रकार क्या होते हैं, वीजा के प्रकार क्या होते हैं। उन्हें सिखाया जाए कि किसी भी विदेश जॉब के लिए एजेंट का लाइसेंस नंबर मांगना जरूरी है और उसे http://www.emigrate.gov.in पर चेक करना है। उन्हें फर्जी ईमेल, फर्जी कंपनी वेबसाइट, और "पैसे पहले" वाले ऑफर की पहचान सिखाई जाए। उन्हें ये भी बताया जाए कि अगर दोस्त या रिश्तेदार विदेश से "जल्दी आ जाओ, काम पक्का है" कहे तो भी पहले दूतावास से वेरिफाई करना जरूरी है। साथ में गुड टच बैड टच की तरह "सुरक्षित प्रवासन के 5 नियम" का पोस्टर हर क्लास में लगे। कॉलेज स्तर पर इसे और गंभीरता से लेना होगा। UGC को निर्देश देना चाहिए कि हर डिग्री और डिप्लोमा कोर्स के साथ "Safe and Legal Migration" नाम का 2 क्रेडिट का अनिवार्य पेपर हो। ये पेपर थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों हो। थ्योरी में अंतरराष्ट्रीय श्रम कानून, गंतव्य देशों के नियम, वित्तीय साक्षरता, लोन और स्कॉलरशिप के विकल्प पढ़ाए जाएं। प्रैक्टिकल में छात्रों से कहा जाए कि वो किसी एक देश की कंपनी को चुनें और उसके वर्क परमिट की प्रक्रिया खुद रिसर्च करके प्रेजेंटेशन दें। प्लेसमेंट ऑफिसर की ट्रेनिंग में विदेश मंत्रालय के अधिकारी शामिल हों। हर कॉलेज में "Career and Safe Migration Cell" बने जिसका काम सिर्फ प्लेसमेंट नहीं, बल्कि छात्रों को धोखे से बचाना भी हो। हर 6 महीने में दूतावास, NGO और पुलिस मिलकर कैंपस में वर्कशॉप करें जहां लौटकर आए पीड़ित अपनी कहानी सुनाएं। इस पाठ्यक्रम में 4 चीजें जरूर होनी चाहिए। पहला कानूनी साक्षरता। छात्र को पता होना चाहिए कि टूरिस्ट वीजा पर काम करना गैरकानूनी है, पासपोर्ट किसी को गिरवी नहीं रखा जा सकता, और विदेश में कम से कम मजदूरी कितनी है। दूसरा वित्तीय जागरूकता। 15 लाख एजेंट को देने के बजाय बैंक से एजुकेशन लोन, स्किल इंडिया के प्रोग्राम, और सरकारी स्कॉलरशिप कैसे मिलती है। तीसरा भाषा और स्किल। IELTS, PTE, जर्मन, जापानी भाषा और टेक्निकल स्किल के बिना विदेश में आप सिर्फ सस्ता मजदूर बनेंगे। चौथा असली कहानियां। किताबी ज्ञान से डर नहीं लगता। जब छात्र सुनेंगे कि कैसे एक इंजीनियरिंग का लड़का "कॉल सेंटर जॉब" के नाम पर लाओस ले जाया गया और 8 महीने तक ऑनलाइन ठगी करवाई गई, तब उन्हें समझ आएगी। अब कोई कहेगा कि सिलेबस पहले ही बहुत भारी है, टीचर पहले ही कम हैं, ये नया बोझ क्यों। इसका जवाब ये है कि क्या एक क्रेडिट कोर्स एक जिंदगी से भारी है। क्या एक पीरियड एक परिवार को कर्ज और शर्म से नहीं बचा सकता। हमने कोरोना के बाद सिलेबस में डिजिटल साक्षरता जोड़ी, साइबर सुरक्षा जोड़ी। तो प्रवासन सुरक्षा क्यों नहीं जोड़ सकते। इसके लिए नया टीचर रखने की जरूरत नहीं है। सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य और कानून के प्रोफेसरों को 15 दिन की ट्रेनिंग देकर ये काम करवाया जा सकता है। खर्च भी बहुत नहीं है। विदेश मंत्रालय, IOM और कई NGO इस काम के लिए फंड और ट्रेनर देने को तैयार हैं। इसके साथ सरकार को 3 काम और करने होंगे। पहला, POE से अप्रूव्ड एजेंटों की लिस्ट को हर स्कूल-कॉलेज की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर लगाना अनिवार्य हो। दूसरा, सोशल मीडिया कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया जाए। Facebook और Instagram पर "विदेश जॉब" का विज्ञापन तभी चले जब उसमें POE नंबर हो। तीसरा, लौटकर आए पीड़ितों के लिए पुनर्वास। उन्हें अपराधी की तरह न देखा जाए। उन्हें स्किल देकर दोबारा खड़ा किया जाए ताकि वो दूसरों को जागरूक कर सकें। अंत में ये समझना जरूरी है कि हम प्रवासन रोकना नहीं चाहते। भारत का युवा दुनिया में झंडा गाड़े, ये हमारी ताकत है। NASA में, Google में, दुबई में, जर्मनी की फैक्ट्रियों में भारतीयों का नाम है। लेकिन फर्क इस बात का है कि वो सम्मान से गए या मजबूरी में फंसे। एक तरफ वो युवा हैं जो स्कॉलरशिप लेकर MIT गए। दूसरी तरफ वो युवा हैं जो 12 लाख देकर कंबोडिया में साइबर गुलाम बने। दोनों में फर्क सिर्फ जानकारी का है। इसलिए सरकार "कौशल भारत" के साथ "सुरक्षित भारत" को भी जोड़े। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के साथ "प्रधानमंत्री सुरक्षित प्रवासन योजना" भी चले। हर जिले में एक हेल्प डेस्क हो जहां माता-पिता जाकर पूछ सकें कि ये एजेंट सही है या नहीं। कॉलेज सिर्फ डिग्री नहीं देता। वो जिंदगी के लिए तैयार करता है। और आज की जिंदगी में सबसे जरूरी स्किल है - सुरक्षित निर्णय लेना। अगर हमने आज स्कूल और कॉलेज में प्रवासन की शिक्षा शुरू कर दी, तो 5 साल बाद हमारे आंकड़े बदल जाएंगे। दूतावासों में शिकायतें कम होंगी, कर्ज के मामले कम होंगे, और भारत का नाम "कुशल और सुरक्षित" कामगारों के देश के रूप में होगा। क्योंकि अंत में बात बहुत छोटी है। सपना देखना गलत नहीं है। गलत है आंख बंद करके सपनों के पीछे भागना। एक घंटे की क्लास, एक सही जानकारी, एक जागरूक छात्र - ये तीनों मिलकर तस्करों के दस जाल तोड़ सकते हैं। और यही समय की मांग है। "डिग्री के साथ सुरक्षा भी जरूरी है। सपना विदेश का हो, पर रास्ता कानून का हो"

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